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सोमवार, 16 सितंबर 2019

अपामार्ग(चिरचिटा ) का औषधीय प्रयोग इसका परिचय व इसके आयुर्वेदिक गुँण

अपामार्ग(चिरचिटा ) का परिचय इसकी जड़ , तने व पंचाग के फायदे  – Apamarg(Chirchita) ka parichaya Iski Jad, Tane v Pure Plant Ke Fayde Hindi Me



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अपामार्ग(चिरचिटा ) का परिचय इसकी जड़ , तने व पंचाग के फायदे


अपामार्ग का पौधा (Apamarga plant)सम्पूर्ण भारत के शुष्क इलाकों में उत्पन्न होता है। यह शहरो की अपेक्षा गांवों में ज्यादा मिलता है। घास के साथ खेतों की मेढ़ों के आसपास यह विशेषतः पाया जाता है।सामान्यतः इसकी ऊंचाई  2 से 4 फुट पायी जाती है।आमतौर पर अपामार्ग(Apamarg) लाल और सफेद दो प्रकार का होता है।

अपामार्ग(चिरचिटा ) का परिचय इसकी जड़ , तने व पंचाग के फायदे

सफेद अपामार्ग (Safed Apamarg) के पत्ते व डंठल हरे रंग के तथा इसके पत्तों पर भूरे और सफेद रंग के दाग होते हैं। इसके फल चपटे होते हैं, जबकि लाल अपामार्ग का डंठल का रंग लाल  और इसके पत्तों पर लाल-लाल रंग के दाग होते हैं।इस पौधे पर पुष्प व बीज मंञरी के रुप में लगते हैं इसके फल कुछ चपटे और कुछ गोल होते हैं। इसकी पुष्प मंजरी में बीज नुकीले कांटे के समान लगते हैं।वैसे तो दोनों प्रकार के अपामार्ग के गुण लगभग समान ही होते है। फिर भी सफेद अपामार्ग गुँणों की दृष्टि से कुछ अधिक गुँणकारी होता है। अपामार्ग के पत्ते कुछ गोलाई लिए हुए होते है जो 1 से 5 इंच लंबे तक हो जाते हैं।किन्तु चौड़ाई आधे इंच से ढाई इंच तक ही होती है। पुष्प मंजरी की लंबाई लगभग एक फुट होती है, जिस पर फूल लगते हैं।अपामार्ग के पौधे पर सर्दी के समय फल लगते हैं जो गर्मी में पककर सूख जाते हैं।और जानवरों के शरीर में लगकर इधर उधर प्रकीर्णित होते हैं ये बीज चावल के दानों के समान होते हैं जो मंजरी के सूख जाने पर ही निकलते हैं। अपामार्ग वर्षा ऋतु में पैदा होता है और गर्मी में सूख जाता है।

अपामार्ग के विभिन्न भाषाओं में नाम

  1. संस्कृत में (Apamarg In Sanskrit)-अपामार्ग।
  2. हिंदी में (Apamarg In Hindi) – चिरचिटा , आधाझाड़ा।
  3. मराठी में (Apamarg In Marathi) – अघाड़ा।
  4. गुजराती में (Apamarg In Gujrati)- अधेड़ों।
  5. बंगाली में (Apamarg In Bengali)- अपांग।
  6. अंग्रेजी में (Apamarg In English)- प्रिकली चाफ फ्लावर (Prickly Chalfflower)।
  7. लैटिन में (Apamarg In Latin) -एचिरेन्थस ऐस्पेरा (Achyranthes Aspera) |

अपामार्ग के आयुर्वेदिक व औषधीय गुण Apamarg Ke Ayurvedic Aushadhiya Gun

apamarg ke fayde

अपामार्ग(चिरचिटा ) का परिचय इसकी जड़ , तने व पंचाग के फायदे


अपामार्ग तिक्त,गर्म प्रकृति, कटु, तीक्ष्ण,  विपाक में कटु प्रकृति का होता है। यह दस्तावर, चरपरा, पाचक, रुचिकारक और दर्द-निवारक और अग्नि प्रदीपक है, इसके अतिरिक्त यह विष नाशक, कृमि नाशक व पथरी नाशक है, यह रक्तशोधक, ज्वरहर, श्वास हर, भूख नियंत्रक, व सुखपूर्वक प्रसव कराने वाला एवं गर्भधारणार्थ उपयोगी औषधि है।
वैज्ञानिक मतानुसार  रासायनिक विश्लेषण करने से इसमें पोटाश क्षार 30% , चूना 13%, सोरा क्षार 7 %, लोहा 4%, नमक 2% एवं गंधक 2% पाया गया है। ये तत्व पत्तों की राख की अपेक्षा इसकी जड़ की राख में  अधिकता से मिलते हैं।
यूनानी मत से अपामार्ग पहले दर्जे की शीतल, वीर्यवर्धक, कामोद्दीपक, मूत्र लाने वाली तथा धातु शोघक है।

अपामार्ग सेवनीय मात्रा--- #Apamarg Chirchita ,How To Take

 अपामार्ग के पत्ते, जड़ व बीज का चूर्ण 3 से 5 ग्राम लेना चाहिये । जबकि पत्र रस  10 से 20 मिलीलीटर उपयुक्त मात्रा है। अगर भस्म लेनी हो तो 500 मिली ग्राम  से1 ग्राम तक उचित मात्रा है।

अपामार्ग (चिरचिटा) –  से रोगों का इलाज 

आपमार्ग यानी चिरचिटा अनेकों रोगों के इलाज में लाभकारी है यहाँ तक कहा जा सकता है कि यह एक सम्पूर्ण औषधि है इसी कारण इसे आय़ुर्वेद ने दिव्य औषधि का दर्जा दिया हुआ है। इसके कुछ विशेष रोगों पर लाभ निम्नांकित है।

1. विषैले कीड़े मकोड़ों के काटने पर अपामार्ग के प्रयोग---- Apamarg Se Vishaile jeevo ke kate ka Upchar-

सांप, बिच्छू, जहरीले कीड़ों व जानवरों के काटने पर काटे हुये स्थान पर अपामार्ग के पत्तों का ताजा रस लगाना चाहिये और इसके ताजा पत्तों का रस 2 चम्मच लेकर दिन में 2 बार पिलाने से विष का असर तुरन्त कम हो जाता है और इससे काटे स्थान पर जलन व दर्द में आराम मिलता है। पत्तों की पिसी हुई लुगदी से दंशित स्थान को पट्टी से बांध देने से सूजन नहीं आती और दर्द दूर हो जाता है।अगर सूजन चढ़ चुकी हो, तो वह भी शीघ्र ही उतर जाती है।

2. दांत के रोगों मे अपामार्ग का प्रयोग  daant ke rogon me apaamaarg ka prayog
अपामार्ग पुष्प मंजरी को  नियमित रूप से पीसकर दांतों पर मलकर मंजन करने से दांत मजबूत हो जाते हैं।  इसके पत्तों के रस को दुखते हुये दांतों पर लगाने से दांत के दर्द में राहत मिलती है। इसके तने या जड़ की दांतून करने से भी दांत मजबूत होते हैं तथा मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है।

3. प्रसव मे सुगमता के लिए अपामार्ग का प्रयोग-- Apamarga Root 
prasav me sugamata ke lie
 अगर प्रसव में ज्यादा विलम्ब हो रहा हो और पीड़ा असहनीय हो रही हो, तो रविवार या पुष्य नक्षत्र वाले दिन जड़ सहित उखाड़े सफेद अपामार्ग की जड़ को काले कपड़े में बांधकर प्रसूता के गले में बांधने से या फिर कमर में  बांधने से शीघ्र प्रसव हो जाता है। लैकिन ध्यान रहे प्रसव के तुरंत बाद जड़ शरीर से अलग कर दी जाऐ, नही तो  गर्भाशय भी बाहर निकल सकता है। इसकी जड़ को पीसकर पेड़़ू पर लेप लगाने से भी यह लाभ प्राप्त किया जा सकता है। किन्तु ध्यान से लाभ होने के तुरन्त बाद लेप को पानी से साफ कर देना चाहिये।

4. स्वप्नदोष की आयुर्वेदिक घरेलू औषधि-- 
svapnadosh kee aayurvedik ghareloo aushadhi

आयुर्वेद में पुरुषों के रोगों के उपचार में भी अपामार्ग का प्रयोग किया जाता है | अपामार्ग की जड़ का चूर्ण और  मिश्री को  बराबर मात्रा में लेकर पीसकर रख लें। और प्रतिदिन एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार एक से दो हफ्ते तक सेवन करें तो स्वप्नदोष दूर होगा।|

5. मुंह के छाले मे अपामार्ग का प्रयोग---- Muh Ke Chhale Ke Upchar me apaamaarg ka prayog

मुह के छालों अपामार्ग से फायदा प्रदान करता है । मुह के छालों के  लिए अपामार्ग के पत्तों का रस छालों पर लगाया जाऐ तो छालों में आराम मिलता है । इससे 2 दिन में ही छाले ठीक हो जाते हैं और पूरी तरह ठीक होने के लिए 7 दिन लग सकते हैं।

6. शीघ्रपतन के इलाज में अपामार्ग का प्रयोग-- Apamarg Se Sheegrapatan Ka Gharelu Upchar
शीघ्रपतन के इलाज के लिए अपामार्ग की जड़ को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। फिर इसका चूर्ण बना लें इस चूर्ण की 2 चम्मच की मात्रा लेकर एक चम्मच शहद मिला लें। इस अवलेह को एक कप ठंडे दूध के साथ नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक सेवन करने से स्तम्भन बढ़ता है।

7. संतान प्राप्ति के लिए अपामार्ग का प्रयोग ----- Chirchita Se Santaan prapti me apaamaarg ka prayog

अपामार्ग की जड़ के उपरोक्त चूर्ण की एक चम्मच मात्रा दूध के साथ ऋतुकाल के बाद नियमित रूप से 21 दिन तक सेवन करने से अवश्य ही गर्भधारण होता है। और इसके अलावा इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए  अपामार्ग के ताजे पत्तों के दो चम्मच रस में एक कप दूध मिलाकर ऋतुस्नान के बाद नियमित सेवन से 21 दिन सेवन करके भी गर्भ स्थिति की संभावनाएं बढाई जा सकती है।

8. अधिक भूख को कम करने के लिए अपामार्ग या चिरचिटा का प्रयोग Bhookh Kam Karne Ke Liye Apamarg Ka Prayog
 जिन लोगों का वजन विना कारण ही बढ़ रहा हो या जिन्हैं अधिक भूख की शिकायत हो  वे लोग अपामार्ग के चावलों की  खीर बनाकर नियमित सेवन करना चाहिए। इसके प्रयोग से शरीर की चर्बी धीरे-धीरे घटने लगेगी।

9. कमजोर दूर करने और शरीर पुष्टि हेतु अपामार्ग का प्रयोग--- Body Ko Strong Banane Me me apaamaarg ka prayog
कमजोर व्यक्ति अगर अपामार्ग के बीजों को भूनकर इसमें बराबर की मात्रा में मिसरी मिलाकर पीस लें। और इसे एक कप दूध के साथ 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करे इससे शरीर की कमजोरी दूर होकर शरीर पुष्ट हो जाता है।

10. सिर दर्द को ठीक करने में अपामार्ग का प्रयोग--- Sir Dard Ke Upchar Me me apaamaarg ka prayog

चूँकि अपामार्ग की बाहरी तासीर ठण्डी होती है अतः यह सिर दर्द में फायदा करता है। इसके लिए अपामार्ग की जड़ को पानी में घिसकर लेप बना लें। इस लेप को मस्तक पर लगाने से सिर दर्द दूर हो जाता है।

11. मलेरिया से बचाव में अपामार्ग का प्रयोग ---- Malaria Ka Gharelu Upchar 
me apaamaarg ka prayog

अपामार्ग पत्र और काली मिर्च बराबर-बराबर मात्रा में लेकर पीसें, फिर इसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां तैयार करें। जब मलेरिया महामारी के रुप में फैल रहा हो, उन दिनों एक-एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद नियमित रुप से सेवन करने से मलेरिया ज्वर का शरीर पर आक्रमण ही नहीं होगा। यह गोलिया केवल 2-4 दिन सेवन करने से ही पर्याप्त लाभकारी है।

12. गंजेपन में अपामार्ग का प्रयोग---- Ganjapan Ke ilaj Me me apaamaarg ka prayog

अपामार्ग के पत्तों को सरसों के तेल में जलाकर सिल पर पीस लें और मलहम बना लें। इस मलहम को गंजे स्थानों पर नियमित रूप से लेप करते रहने से पुनः बाल उगने की संभावना पैदा हो जाती है।

13. खुजली को ठीक करने के लिए अपामार्ग का प्रयोग--- Khujali Ko Theek Karne Ke Liye me apaamaarg ka prayog

अपामार्ग के पंचांग की समान मात्रा को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें और इससे स्नान करने से खुजली रोग दूर होता है प्रयोग नीयमित कुछ दिन किया जाना चाहिये।

अतः इन सब बातों को जानने के बाद आपको पता लग गया होगा कि अपामार्ग वाकई एक दिव्य औषधि है जो अनेको रोगों को दूर करने की शक्ति रखती है और यह औषधि अपने दिव्य होने का नाम सार्थक करती है। 

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