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सोमवार, 14 मार्च 2022

ग्लूटाथियोन न केवल गोरा बनाता है वल्कि युवा भी रखता है, आओ घरलू प्रयोगों से इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है जाने

Glutathione not only makes you fair but also keeps you young.
ग्लूटाथियोन न केवल गोरा बनाता है वल्कि युवा भी रखता है, आओ घरलू प्रयोगों से इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है जाने
 
ग्लूटाथिओन क्या होता है इन हिंदी?

आजकल क्रीम, साबुन, जलसेक और कैप्सूल के रूप में ग्लूटाथियोन जीएसएच की बहुत चर्चा सुनी जाती है कहा जा रहा है कि ये सभी वस्तुएं त्वचा व ऊर्जा के स्तर को बहेतर बनाती हैं ,आखिर है क्या यह ग्लूटाथियोन जिसकी चारों तरफ चर्चा हो रही है , और यह हमारी त्वचा व ऊर्जा के स्तर को बहेतर करने के लिए कैसे कार्य करता है आइये जानते हैं।

ग्लूटाथियोन  ( Glutathione (GSH) ) आधुनिक विज्ञान के अनुसार प्राकृतिक रूप से हमारी कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक एंटीऑक्सीडेंट है। जो  हमारी त्वचा को अंदर से निखारने का काम करता है। यह हमारी त्वचा को अंदर से पोषण देता है। वास्तव में एंटीऑक्सीडेंट वे पदार्थ हैं जो शरीर में मुक्त कणों का मुकाबला करके ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं। ग्लूटाथिओन हमारे शरीर द्वारा स्वंयं निर्मित होता है। यह मुख्य रूप से तीन एमीनो एसिड से बना होता है जो इस प्रकार हैं ।

  1. ग्लूटामाइन 
  2. ग्लाइसिन 
  3. सिस्टीन

 ग्लूटाथियोन जीएसएच को शोर्ट में ग्लूटाथियोन के नाम से भी पुकारा जाता है।

ग्लूटाथियोन में जो एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाये जाते हैं वे उसके एंटीमेलोजेनिक गुणों के साथ जुड़े हैं। यह  एक तरफ तो यह हमारी त्वचा में पिग्मेंटेशन को कम करता है, वहीं दूसरी ओर अनचाही झुर्रियां भी घटाता है और साथ ही साथ त्वचा में लचीलापन भी बढ़ाता है। यह मेलानिन के निर्माण में शामिल होने वाले टायरोसाइनेज नामक एंजाइम को रोककर त्वचा के पिग्मेंटेशन को भी रोकता है। इसीलिए इसे मास्टर एंटीऑक्सीडेंट भी कहा जाता है।एक प्रकार से यह कहा जा सकता है कि यह सुन्दरता को निर्धारित करने वाला तत्व है जिसे शरीर स्वयं ही निर्मित करता है हाँ हम यह कर सकते हैं कि हम जिन पदार्थों का अपने दैनिक जीवन में प्रयोग करें उनमें ग्लूटाथियोन की मात्रा हो और आयुर्वेद ने तो हमेशा से सुन्दरता के लिए फलों व फूलों के प्रयोग की अवधारणा प्रस्तुत की है और जैसा कि आधुनिक शोधों से निर्धारित हुआ है यह तत्व फलों, सब्जियों व फूलों तथा बीजों में पर्याप्त रुप से प्राप्त होता है। आइये आज ग्लूटाथियोन के बारे में चर्चा करते हैं। और आपको एक एसा आयुर्वेदिक फार्मूला बताते हैं जो प्राकृतिक भी होगा और साइड इफेक्ट फ्री भी होगा।   

ग्लूटाथियोन न केवल गोरा बनाता है वल्कि युवा भी रखता है, आओ घरलू प्रयोगों से इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है जाने
ग्लूटाथियोन गोरे होने के लिए कैसे कारगर है।

ग्लूटाथियोन जीएसएच हमारे शरीर में मुख्य एंटीऑक्सिडेंट है जो लगभग हर कोशिका में देखा जा सकता है, लेकिन इसकी सबसे अधिक मात्रा लिवर अर्थात यकृत में पाई जाती है। लिवर से यह हमारी आंत में पहुंचता है, जहां से इसे संचार प्रणाली द्वारा अवशोषित किया जाता है और यहीं से यह पूरे शरीर में वितरित किया जाता है।सामान्य परिस्थितियों में ग्लूटाथियोन जीएसएच हमारे लिए बाहर से लेने के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व नहीं है, क्योंकि इसके घटक अमीनो एसिड से इसे शरीर में स्वयं ही संश्लेषित किया जा सकता है। लेकिन किसी वायरस या बैक्टीरिया के अटेक , प्रदूषण आदि की विषाक्तता, विकिरण, कुछ विशेष दवाओं के प्रयोग और यहां तक कि उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया, स्वस्थ कोशिकाओं में तनाव इसके संश्लेषण की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकती है और जीएसएच के जरुरी स्तर को कम कर सकती है। एक अध्ययन में पाया गया कि जीएसएच एंटीऑक्सिडेंट प्रणाली यकृत रोगों में असंतुलित होती है, जिससे ऑक्सीडेटिव तनाव में वृद्धि होती है।

ग्लूटाथियोन के फायदे ----



आइये जानते है कि इसके हमारे शरीर के लिए क्या व कैसे फायदेमंद हैं--

ग्लूटाथियोन सोरायसिस और कई अन्य संक्रमण जनित त्वचा रोगों के इलाज में बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा ग्लूटाथियोन पुरानी से पुरानी सूजन को दूर करने में भी बुहत ज्यादा लाभदायक है । इस तरह ग्लूटाथियोन त्वचा को फिर से जीवंत और जवां करने वाला शरीर स्रावित एंटीआक्सीडेंट है ।
जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूँ कि ग्लूटाथियोन तीन अलग-अलग अमीनो एसिड्स से बना है। यह हमारी कोशिकाओं में समय से पहले होने वाले नुकसानों को रोकता है और हमारे शरीर की कोशिकाओं में माइटोकॉण्ड्रिया को स्वस्थ बनाए रखता है। जो हमारे शरीर में ऊर्जा उत्पादन का स्रोत अर्थात हमारी कोशिका का पावरहाउस हैं अतः इससे हम ऊर्जावान और स्टेमिना यानी आंतरिक शक्ति से भरे रहते हैं। बहुत पुराने समय से ही ग्लूटाथियोन को त्वचा की देखभाल के एक प्रमुख घटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है । अतः इसकी पर्याप्त मात्रा हमारे शरीर में
इसके सक्रिय रूप से काम करने के लिए आवश्यक है जिससे यह अपने दमदार एंटीऑक्सीडेंट प्रभावों की बदौलत प्रदूषण, तनाव या बुढ़ापे की प्रक्रिया के चलते होने वाले काले धब्बों और त्वचा संबंधी अन्य विसंगतियों को असरदार ढंग से कम करता रहे और हमें ज्यादा समय तक युवा व क्रियाशील बनाए रखे । यह हमारी त्वचा की संपूर्ण रंगत में निखार लाता है। ग्लूटाथियोन हमारी कोशिकाओं के अन्दर हमारी त्वचा को अंदर से निखारने में सहयोगी एक आंतरिक सिस्टम विकसित करता है। जिससे हमारी त्वचा खिलीखिली स्वस्थ व युवा बनी रहे, इस तरह यह त्वचा के समग्र स्वास्थ्य के लिए आपका बेहतरीन टॉनिक है।

इसी कारण यह हमारे चहेरे से झाईयों, उम्र के निशान , सनबर्न, मुंहासों के निशान, और अन्य प्रकार के हाइपरपिग्मेंटेशन और मेलेलिन करण( त्वचा को रंग देने वाली कोशिकाओं का निर्माण) को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है । जिसके कारण हमारी त्वचा का रंग गोरा होता है। अमीनो एसिड की प्रचुरता के कारण ग्लूटाथियोन का एक और विशेष फायदा है त्वचा के लिए एंटी एजिंग प्रोपर्टी । चूंकि यह हमारी त्वचा को मुक्त कणों अर्थात फ्री रेडीकल्स व आक्सीडेटिव तनाव से बचाता है जिससे एंटी एजिंग प्रोपर्टी के साथ हमारे शरीर की झुर्रियों, महीन रेखाओं, ढीली त्वचा व काले घेरे भी इसकी पर्याप्त मात्रा होने पर धीरे धीरे समाप्त होते जाते हैं। इसके अतिरिक्त हमारे शरीर की विषहरण शक्ति को भी ग्लूटाथियोन विकसित करता है ग्लूटाथियोन महत्वपूर्ण एंजाइमों को सक्रिय करने में भी सहायक है जिससे हमारे लिवर की कार्यक्षमता बढ़ती है और हमारा लिवर हानिकारक तत्वों को दूर करने में महती भूमिका निभा पाता है।
इम्‍यूनिटी मजबूत करता है ग्लूटाथियोन ---

ग्लूटाथियोन वैसे तो जीव कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रभुप्रदत्त एंटीऑक्सीडेंट है। लेकिन हमारी शहरी भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और हमारी बढ़ती उम्र इसके बनने की प्रक्रिया पर असर डालती है जिससे हमारे शरीर में इसका उत्पादन मंद पड़ जाता है इससे कई तरह की बीमारियां होने की संभाबना रहती हैं। ग्लूटाथियोन का काम फ्री रैडिकल्स को बेअसर करना और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालना (डिटॉक्सिफाइ करना) है।

ग्लूटाथियोन रक्त में प्रोटीन के स्तर, विभिन्न एंजाइमों और बिलीरुबिन के स्तर में सुधार करने में मदद करता है, विशेष रूप से अल्कोहलिक और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग से पीड़ित लोगों के लिए। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि यह लिवर को शुद्ध करने और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए एक शानदार एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है।

ग्लूटाथियोन के स्रोत- Glutathione (GSH) Sources ---

विटामिन-सी युक्त फलों व सब्जियों का भरपूर प्रयोग -- ग्लूटाथियोन ( Glutathione (GSH) ) जीएसएच उत्पादन के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने वाले अन्य विटामिन और खनिज बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन, विटामिन डी, ए, ई और सी और कुछ खनिज जैसे जस्ता, सेलेनियम आदि हैं। इसके अलावा विटामिन-सी एक जरूरी विटामिन है और इम्युनिटी बढ़ाने में अग्रणी स्थान रखता है। यह असरदार एंटीऑक्सीडेंट न सिर्फ फ्री रैडिकल्स के विस्फोट को बेअसर करता है, बल्कि प्रतिरक्षा कोशिकाओं की चुस्ती-फुर्ती भी बढ़ाता है। यह सूजन को भी नियंत्रण में रखता है और कोशिकाओं के बीच संकेत को बेहतर बनाने में मदद करके इम्‍यून सिस्‍टम को ज्यादा असरदार बनाता है। जब हमारा इम्‍युन सिस्‍टम रोगाणुओं से लड़ता है, तो विटामिन-सी का स्तर तेजी से गिरता है, जिसके चलते शरीर का रिस्पॉन्स कमजोर पड़ता है।


आपके शरीर के ग्लूटाथिओन स्तर के विगड़ने के खराब आहार, कोई पुरानी बीमारी, वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण और निरंतर तनाव सहित कोई एक या कई कारण हो सकते हैं। ग्लूटाथिओन जैसा कि हम जान चुके हैं कि इसका स्तर उम्र के साथ घटता है अतः इस एंटीऑक्सीडेंट के पर्याप्त स्तर को बनाए रखना अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण है.

अतः जब इसका स्तर गिरता दिखाई दे तो स्‍किन को भीतरी पोषण देना न भूलें। चमकदार और यंग लुकिंग स्‍किन पाने के लिए ग्लूटाथियोन और विटामिन-सी से अच्‍छा भला और क्‍या हो सकता है। अगर आपको चेहरे पर पिग्मेंटेशन, झुर्रियां और दाग-धब्‍बों को अगर दूर करना है, तो ग्लूटाथियोन से दोस्‍ती करनी ही पड़ेगी। फिर भी दवा के रुप में ग्लूटाथियोन का प्रयोग बहुत ज्यादा लाभकारी नही हो सकता और इसके अलावा बिना किसी डाक्टर के मार्गदर्शन के ग्लूटाथियोन का प्रयोग नुकसानदायक भी हो सकता है क्योंकि हमारा शरीर इसे स्वयं ही संश्लेषित करता है।

आयुर्वेद ने हमेशा से शरीर के गोरेपन के लिए फलों फूलों दूध व मेवाओं का प्रयोग बताया हुआ है उसका कारण यह है कि इन्हीं वस्तुओं में ग्लूटाथियोन पर्याप्त मात्रा में मिलता है हमें जानना चाहिये कि एवोकाडो, ब्रोकोली, गोभी, फूलगोभी, मूली, शतावरी, लहसुन और प्याज, करक्यूमिन और जीरा जीएसएच स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा मुलहठी में भी इसकी पर्याप्त मात्रा मिलती है

आज हम आपको एक ऐसा आयुर्वेदिक प्रयोग बताने जा रहे हैं जिसका लगातार 6 माह तक प्रयोग ग्लूटाथियोन के स्तर में आश्चर्यजनक रुप से बेहतर कर देता है। यह आपके चहेरे के दाग धब्वों, टनिंग,सनबर्न, फ्रेकल्स को तो दूर करेगा ही साथ ही मेलानिन से जुड़ी अन्य समस्याओं से भी आपको निजात दिलाएगा। और इसके साथ ही आपको कहीं भी जाने की आवश्यकता नही है यह पाउडर आप अपने घर में आसानी से बना सकते हैं।



नासपाती में ग्लूटाथियोन बहुत बड़ी मात्रा में पाया जाता है विशेष बात यह है कि नाशपाती के छिलके में ही 7 प्रतिशत ग्लूटाथियोन पाया जाता है मतलब यह है कि 700 ग्राम नाशपाती के छिलके में कुल 100 ग्राम ग्लूटाथियोन प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा गोरेपन के लिए जो दूसरा तत्व जरुरी है वह है आर ब्यूटेन वह भी इस सामान्य सी नाशपाती में पर्याप्त मात्रा में मिलता है आर ब्यूटेन क्रीम व सीरम में बहुतायत से प्रयोग होने वाला कम्पोनेंट है यह भी स्किन के कलर को व कम्प्लेक्सन को इम्प्रूव करने का कार्य करता है। इससे आपकी त्वचा पर निखार आता है और उसकी रंगत बदल जाती है। इससे स्किन गोरी व वेदाग होती है।


बनाने की विधि-- ग्लूटाथियोन व आर ब्यूटेन को प्राकृतिक रुप में प्राप्त करने के लिए आप नासपातियों को लेकर साफ पानी से अच्छी प्रकार धो लें और पानी निचुड़ जाने तक किसी सूती कपड़े पर डालकर पानी सुखा लें फिर किसी चाकू इत्यादि से उसके बारीक बारीक चिप्स काट लें इन चिप्स को धूप में न रखकर छांव में रखकर सुखा लें। छाया में सूख जाने के बाद में इन चिप्स को मिक्सी में डालकर बारीक पाउडर बना लें और इतनी ही मात्रा में खसखस लेकर उसका भी बारीक पाउडर बना लें । इन दोनों को आपस में मिलाकर मिक्सी में चलाकर अच्छी प्रकार से मिक्स कर लें इनके मिलने से एक प्रकार का रिएक्सन होता है जिससे इस पाउडर में ग्लूटाथियोन की परसेंटेज बढ़ जाती है। इसके प्रयोग से त्वचा पर मेलेनिन के प्रभाव व गोरेपन में तो जो फायदा होता है वो तो होता ही है साथ ही इस पाउडर के प्रयोग से जिन बच्चों की याद करने की शक्ति कम होती है या जो याद किया हुआ भूल जाते हैं वे भी अपनी मेमोरी पावर को रीचार्ज कर सकते हैं। इसके अलावा इसकी खासियत यह है कि इस फार्मूले को 3 से 100 साल तक या उससे भी ज्यादा उम्र के सभी लोग वेधड़क इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पाउडर को किसी कांच के एयरटाइट बर्तन में ही रखना चाहिये इसके अलावा इस फार्मूले को 1 चम्मच खाली पेट सुबह व 1 चम्मच रात को सोते समय दूध के साथ लेना है चार पांच माह के इस प्रयोग से आपकी त्वचा पर एक स्पेशल सा निखार आता है और मेलेनिन के प्रोडक्सन में कन्ट्रोल होकर एक स्तर तक सुधार आता है। जिससे आपकी त्वचा पर दोवारा से रंगत आने लगती है। इसके अलावा याददास्त में सुधार होता है इसका एक खास प्रयोग यह भी है कि इसके प्रयोग से नर्वस सिस्टम के रोगों मे भी फायदा होता है।


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