Glutathione not only makes you fair but also keeps you young. ग्लूटाथिओन क्या होता है इन हिंदी?
ग्लूटाथियोन ( Glutathione (GSH) ) आधुनिक विज्ञान के अनुसार प्राकृतिक रूप से हमारी
कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक एंटीऑक्सीडेंट है। जो हमारी त्वचा को अंदर
से निखारने का काम करता है। यह हमारी त्वचा को अंदर से पोषण देता है। वास्तव में एंटीऑक्सीडेंट वे पदार्थ हैं जो शरीर में मुक्त कणों का मुकाबला करके ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं। ग्लूटाथिओन हमारे शरीर द्वारा स्वंयं निर्मित होता है। यह मुख्य रूप से तीन एमीनो एसिड से बना होता है जो इस प्रकार हैं ।
- ग्लूटामाइन
- ग्लाइसिन
- सिस्टीन
ग्लूटाथियोन जीएसएच को शोर्ट में ग्लूटाथियोन के नाम से भी पुकारा जाता है।
ग्लूटाथियोन में जो एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाये जाते हैं वे उसके एंटीमेलोजेनिक गुणों के साथ जुड़े हैं। यह एक तरफ तो यह हमारी त्वचा में पिग्मेंटेशन को कम करता है, वहीं दूसरी ओर अनचाही झुर्रियां भी घटाता है और साथ ही साथ त्वचा में लचीलापन भी बढ़ाता है। यह मेलानिन के निर्माण में शामिल होने वाले टायरोसाइनेज नामक एंजाइम को रोककर त्वचा के पिग्मेंटेशन को भी रोकता है। इसीलिए इसे मास्टर एंटीऑक्सीडेंट भी कहा जाता है।एक प्रकार से यह कहा जा सकता है कि यह सुन्दरता को निर्धारित करने वाला तत्व है जिसे शरीर स्वयं ही निर्मित करता है हाँ हम यह कर सकते हैं कि हम जिन पदार्थों का अपने दैनिक जीवन में प्रयोग करें उनमें ग्लूटाथियोन की मात्रा हो और आयुर्वेद ने तो हमेशा से सुन्दरता के लिए फलों व फूलों के प्रयोग की अवधारणा प्रस्तुत की है और जैसा कि आधुनिक शोधों से निर्धारित हुआ है यह तत्व फलों, सब्जियों व फूलों तथा बीजों में पर्याप्त रुप से प्राप्त होता है। आइये आज ग्लूटाथियोन के बारे में चर्चा करते हैं। और आपको एक एसा आयुर्वेदिक फार्मूला बताते हैं जो प्राकृतिक भी होगा और साइड इफेक्ट फ्री भी होगा।

ग्लूटाथियोन गोरे होने के लिए कैसे कारगर है।
ग्लूटाथियोन जीएसएच हमारे शरीर में मुख्य एंटीऑक्सिडेंट है जो लगभग हर कोशिका में देखा जा सकता है, लेकिन इसकी सबसे अधिक मात्रा लिवर अर्थात यकृत में पाई जाती है। लिवर से यह हमारी आंत में पहुंचता है, जहां से इसे संचार प्रणाली द्वारा अवशोषित किया जाता है और यहीं से यह पूरे शरीर में वितरित किया जाता है।सामान्य परिस्थितियों में ग्लूटाथियोन जीएसएच हमारे लिए बाहर से लेने के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व नहीं है, क्योंकि इसके घटक अमीनो एसिड से इसे शरीर में स्वयं ही संश्लेषित किया जा सकता है। लेकिन किसी वायरस या बैक्टीरिया के अटेक , प्रदूषण आदि की विषाक्तता, विकिरण, कुछ विशेष दवाओं के प्रयोग और यहां तक कि उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया, स्वस्थ कोशिकाओं में तनाव इसके संश्लेषण की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकती है और जीएसएच के जरुरी स्तर को कम कर सकती है। एक अध्ययन में पाया गया कि जीएसएच एंटीऑक्सिडेंट प्रणाली यकृत रोगों में असंतुलित होती है, जिससे ऑक्सीडेटिव तनाव में वृद्धि होती है।
ग्लूटाथियोन के फायदे ----
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