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गुरुवार, 6 सितंबर 2018

प्रजनन अंगों की स्वच्छता का क्यों ख्याल रखें --- Why take care of cleaness of female reproductive organs

प्रजनन अंगों की स्वच्छता का क्यों ख्याल रखें kyon khyaal rakhana prajanan angon kee svachchhata ka

प्रजनन अंगों की स्वच्छता का---  cleaness of reproductive organsnlines

हमारा शरीर वास्तव में प्रभु की दी हुयी नैमत है जिसका ख्याल रखना हर मानव की जिम्मेदारी है, और अगर हम ऐसा नही करेंगें तो यह शरीर धीरे धीरे करके रोगों का शिकार हो जाएगा और हमें इसकी देखभाल न करने का दण्ड भुगतना पड़ेगा। ज्यादातर व्यक्ति अपने शरीर के उन अंगों पर विशेष ध्यान देते हैं जो खुले रहते हैं। यथा मुँह व हाथ पैर लेकिन जो अंग दबे ढके रहते हैं व्यक्ति उनकी इतनी चिन्ता नही करते हैं।इन्हीं दबे ढके रहने बाले अंगों में शरीर का बेहद सम्वेदनशील हिस्सा हमारे प्रजनन अंग आते हैं।जिनके प्रयोग से हम अपना वंश चलाते हैं। किन्तु अधिकतर मानव इनकी सफाई का विशेष ध्यान शायद कभी ही देते हैं।ऐसे में अक्सर इन अंगों में अनेको रोग लग जाते हैं। जिनमें से ज्यादातर ध्यान न देने के कारण असाध्य हो जाते हैं।
वैसे तो अंगो की देखभाल चाहे स्त्री हो या पुरुष सभी के लिए जरुरी है किन्तु आज हम महिला प्रजनन अंगो पर ध्यान केन्द्रित करके अपनी बात रखेंगे।
प्रजनन अंगों की स्वच्छता बहुत ही जरुरी है क्योंकि ये शरीर के बेहद संवेदनशील हिस्से होते है इनकी सफाई कैसे की जाऐ, सफाई न रखने से क्या क्या रोग हो सकते हैं, यह सब एक माँ ही अपनी बेटी को अच्छी प्रकार से समझा सकती है।प्रजनन अंगों में संक्रमण की संभावना किशोरावस्था से पूर्व और रजोनिवृति के बाद सबसे अधिक होती है।

संक्रमण किस किस प्रकार के हो सकते हैं।What type of infection can be.

सफाई न रखने के कारण ज्यादातर छोटी उम्र की बच्चियों में योनि के चारों तरफ सूजन, पस पड़ जाना, आदि शिकायते आम तौर पर देखी जाती हैं।इसके अलावा सफाई न रखने के कारण ही प्रजनन अंगों यथा योनि में खुजली, चिपचिपा स्राव का बहना, अत्यधिक योनि स्राव होना इसके अलावा अनेकों प्रजाति के वैक्टीरिया, फफूँद, परजीवी आदि रोग भी हो जाते हैं।

 रोग के लक्षण--Symptoms of the disease-

जननांगों में संक्रमण होने पर वहाँ जलन, खुजली, योनिस्राव व घाव हो जाते हैं। महिला को सहवास के समय दर्द व जलन होना आदि की समस्याऐं भी प्रजनन अंगो की सफाई न करने से होती है।

रोग से बचाब अर्थात सफाई ----- Survival of the disease ie cleaning

1- पैंटी कैसी पहने----How worn wearing panties ---

 पैंटी हमेशा सूती पहननी चाहिये। और इसे दिन में दो बार बदलें। लैकिन वाशिंग मशीन में इसे न धोऐँ। पैंटी को हमेशा हाथ से धोकर धूप में ही सुखाना चाहिये। पैंटी को बहुत दिनों की रखी व बद्बू वाली नही पहनना चाहिये। इसे बहुत अधिक कसा हुआ भी नही होना चाहिये।

2. पीरियड के समय स्वच्छता--Cleanliness during periods--

    पीरियड के समय हमेशा पैड का इस्तेमाल करना चाहिये और समय समय पर इसे बदलते रहना चाहिये। कभी भी लंबे समय तक एक ही पैड न लगाऐ रहे। इसे थोड़ा सा गंदा होते ही बदल देना चाहिये।हमेशा साफ सुथरे पैड का ही इस्तेमाल करना चाहिये।

3. प्यूबिक हेयर की सफाई-- Pubic Hair Cleansing -

यहाँ के बालों को साफ करने के लिए ऐनफ्रेंच यानि कि किसी भी तरह के बाल सफा लोशन या क्रीम का प्रयोग नही करना चाहिये।क्योंकि ये लोशन या क्रीम संवेदनशील स्किन में रैशेज हो जाते हैं। इसका अच्छा तरीका है साफ कैंची से बालो को छोटा छोटा कर दें । साफ रेजर से भी वहाँ के बालों की सफाई की जा सकती है। लैकिन ध्यान रहे यह बहुत अच्छा तरीका नही है। इसमें स्किन के कट जाने का खतरा बना रहता है।
लैकिन आजकल बहुत अच्छी अच्छी क्रीम व लोशन आ गये हैं। लैकिन प्रयोग से पहले उऩका परीक्षण किया जाना जरुरी है कि कहीं वे आपकी त्वचा के लिए संवेदनशील तो नही है।

4- प्यूबिक एरिया की क्लीनिंग---Cleaning of Pubic Area -

    प्रजनन अंगो को धोते समय बहुत साबधानी की आवश्यकता है ज्यादातर महिलाओं में सफाई ठीक से न करने की वजह से यूरीनरी ट्रेक में संक्रमण हो जाता है इसका विशेष कारण यह है कि मूत्र छिद्र,योनि व गुदा बहुत पास पास होती हैं। गुदा क्षेत्र की ठीक प्रकार से सफाई न हो पाने से वहाँ से पनपा हुआ बैक्टीरिया मूत्रछिद्र से होकर मूत्र नली में प्रवेश कर जाता है और इसके कारण यू.टी.आई. इन्फेक्सन हो सकता है। अतः यहाँ की सफाई करते समय हाथ को आगे से पीछे की ओर ही ले जाना चाहिये।

5. इलाज----Treatment  समय समय पर फिटकरी घोलकर बनाऐ गये पानी से मूत्र मार्ग में डूस लेने से इस प्रकार की रोकथाम रहती है।और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपनी जानकार लेडी डाक्टर से सहयोग लेना चाहिये।

                                                                                                  साभार --- अमर उजाला रुपायन
                                                                                                            3 नवम्बर 2006
                                                                                                   प्रस्तुति- नीराकुमार
   तत्कालीन जी.एम.मोदी अस्पताल से जुड़ी वरिष्ठ सलाहकार स्त्री रोग विशेषज्ञ लैप्रोस्कोपिक सर्जन व इन्फर्टीलिटी स्पेशलिस्ट- डा. विशाखा गुंजाल की बातचीत पर आधारित

male and female reproductive system ह्यूमन रिप्रोडक्टिव सिस्टम , human reproductive system,   मानव प्रजनन तंत्र,  पुरुष प्रजनन तंत्र  , मानवी प्रजनन क्रिया,


       




मानवों में प्रजनन हेतु जननांग होते हैं, जो स्त्रियों और पुरुषों में भिन्न होते हैं। स्त्री के जननांगो में सबसे पहले बाल होते है जिसे प्यूबिक बाल कहा जाता है। ये बाल स्त्री जननागं को चारों ओर से घेरे रहते है। 

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