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सोमवार, 1 दिसंबर 2014

गले व छाती की बीमारी का इलाज - हल्दी,पान,अदरख,दालचीनी व काली मिर्च आदि से

Ravi Kumar Varshney की फेसबुक पेज से साभार 




गला और छाती की बीमारी का इलाज :
गले में कितनी भी ख़राब से ख़राब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छी दवा है हल्दी । जैसे गले में दर्द है, खरास है , गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टोनसीलाईटिस हो गया ; ये सब बीमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना और मुह खोल कर गले में डाल लें , और फिर थोड़ी देर चुप होके बैठ जावे तो ये हल्दी गले में नीचे चली जाएगी लार के साथ ; और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरुरत नही । ये छोटे बच्चों को तो जरुर करना ; बच्चों के टोन्सिल जब बहुत तकलीफ देते है  तो हम ऑपरेशन करवाके उनको कटवाते है ;आपको एसा  करने की जरुरत नही है ये सब हल्दी से ठीक होता है ।
गले और छाती से जुडी हुई कुछ बीमारिया है जैसे खासी ; इसका एक इलाज तो कच्ची हल्दी का रस है जो गले में डालने से तुरंत ठीक हो जाती है चाहे कितनी भी जोर की खासी हो । दूसरी दवा है अदरक , ये जो अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रख लो और टॉफी की तरह चूसो खाँसी तुरंत बंद हो जाएगी । अगर किसी का खाँसते खाँसते चेहरा लाल पड़ गया हो तो अदरक का रस ले लो और उसमे थोड़ा पान का रस मिला लो दोनों एक एक चम्मच और उसमे मिलाना थोड़ा सा गुड या शहद । अब इसको थोडा गरम करके पी लेना तो जिसका खासते खासते चेहरा लाल पड़ा है उसकी खाँसी एक मिनट में बंद हो जाएगी । और एक अच्छी दवा है , अनार का रस गरम करके पियो तो खासी तुरन्त ठीक होती है । काली मिर्च है गोल मिर्च इसको मुँह में रख के चबा लो पीछे से गरम पानी पी लो तो खासी बंद हो जाएगी, काली मिर्च को चूसो तो भी खाँसी बंद हो जाती है ।
छाती की कुछ बीमारियाँ जैसे दमा, अस्थमा, ब्रोंकिओल अस्थमा, इन तीनो बीमारी का सबसे अच्छी दवा है गौ मूत्र ; आधा कप गौ मूत्र पियो सबेरे का ताजा ताजा तो दमा ठीक होता है, अस्थमा ठीक होता है, ब्रोंकिओल अस्थमा ठीक होता है । और गोमूत्र पीने से टी बी भी ठीक हो जाती है , लगातार पांच छः महीने पीना पड़ता है । दमा अस्थमा का और एक अच्छी दवा है दालचीनी, इसका पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड या शहद मिला कर  गरम पानी के साथ लेने से दमा व अस्थमा ठीक हो जाता  है।

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